सुनहरी धूप सी काया,
मोगरेकी कली के समान मनमोहिनी माया।
सुलक्षणा चपला चंचला सी,
मोहक अस्त्रों से बांधती छाया।
आंखें खोली तो सिर्फ तुम थी
बंद आंखों में भी तुम्हारी माया।
दीवाना में बन गया हूं
सांसो में तुम ही को है पाया।
निमिषा सिंघल
सुनहरी धूप सी काया,
मोगरेकी कली के समान मनमोहिनी माया।
सुलक्षणा चपला चंचला सी,
मोहक अस्त्रों से बांधती छाया।
आंखें खोली तो सिर्फ तुम थी
बंद आंखों में भी तुम्हारी माया।
दीवाना में बन गया हूं
सांसो में तुम ही को है पाया।
निमिषा सिंघल