सुनहरी धूप सी काया,
मोगरेकी कली के समान मनमोहिनी माया।
सुलक्षणा चपला चंचला सी,
मोहक अस्त्रों से बांधती छाया।
आंखें खोली तो सिर्फ तुम थी
बंद आंखों में भी तुम्हारी माया।
दीवाना में बन गया हूं
सांसो में तुम ही को है पाया।
निमिषा सिंघल
मनमोहिनी
Comments
10 responses to “मनमोहिनी”
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Nice
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Thank you
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Good one
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Thank you
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💓💓
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Nice
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Thank you
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वाह
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Thanks
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Wow
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