चलो महोब्बत की बजार चलता हूँ,,
अपने दिल की दर्द को साथ ले चलता हूँ,
देखता हूँ इस बजार मे कोई मेरे जैसा तन्नहा है,,
अगर है!
तो उसको अपने दर पर साथ ले चलता हूँ।।
ज्योति
महोब्बत की बजार

Comments
2 responses to “महोब्बत की बजार”
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वाह
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वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां
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