मुक्तक

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो?
हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो!
नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन,
बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो?

#महादेव_की_कविताऐं’

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Bahut Khob Mahadev Ji

  2. Abhishek kumar

    Good

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