मुक्तक

कभी राहे-जिन्दगी में बदल न जाना तुम!
कभी गैर की बाँहों में मचल न जाना तुम!
सूरत बदल रही है हरपल तूफानों की,
कभी हुस्न की आँधी में फिसल न जाना तुम!

मुक्तककार- #महादेव'(24)

Comments

9 responses to “मुक्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Awesome

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