मुक्तक

मेरी जिंदगी को अंजान सा रहने दो!
दिल में जुस्तजू का तूफान सा रहने दो!
टूटे हुए से ख्वाब हैं पलकों में लेकिन,
अश्कों में यादों को निशान सा रहने दो!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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