मुक्तक

वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला!
तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला!
शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के,
मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

6 responses to “मुक्तक”

    1. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया आपका

    2. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया आपका

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