मुक्तक

मंजिलों के रास्ते कुछ बोल रहे हैं!
रंग दिल में चाहत का घोल रहे हैं!
तिश्नगी ल़बों पर है पैमानों की,
क़दम जुस्तजू के कुछ डोल रहे हैं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

4 responses to “मुक्तक”

    1. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Swagatam Mithlesh ji

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