मुक्तक

अभी तेरी आरज़ू का ग़ुबार है दिल में।
अभी तेरी यादों का संसार है दिल में।
ख़ौफ भी रुसवाई का मौजूद है लेकिन-
अभी तेरे ख़्यालों का बाज़ार है दिल में।

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

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