मुझे लिख लो कहीं
निकलने लगी हूँ
तुम्हारी स्मृति से…
खयालातों की दुनिया से
बेदखल होने लगी हूँ
मुझे छुपा लो कहीं…
तुम जवाब दो हमको
हम जवाब दें तुमको
बातचीत का सिलसिला
नजरों से शुरू हो तो अच्छा है…
चुप हो जाते हो
जब पूंछती हूँ
मुझसे प्यार है या नहीं
तुम्हारी खामोशी को ही
इजहार समझती हूँ
इसमें बुरा क्या है!!