जिनके आने के ख्वाब में हम पलकों को बिछाये बैठे हैं ,
वो किसी और के ख्वाबों को पलकों पर सजायें बैठे हैं
चलों ये गुस्ताखी भी हम माफ करें , गुफ्त़गू के लिये मुलाकात करें ,
पर कब तक यूँ ही बात करें , दिन रात वफा की फरियाद करें ,
आओ हम नई शुरूआत करें ख्वाबों में ही क्यूँ ना मुलाकात करें,
मुलाकात
Comments
5 responses to “मुलाकात”
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nice 1 Ushesh…..keep going!!
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thank you bhaIYA
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वाह
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Good
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Shaandar
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