मैं कितना भी हूं उदास,
वो हंसा ही देते हैं,
मुरझाईं कली को ,
फिर से खिला ही देते हैं,
करता होगा जमाना मोहब्बत,
अपने महबूब से,
मगर वो है कि उसे अंजाम तक
पहुंचा ही देते हैं,
और बहुत ख़ाली-खाली थी
जिन्दगी मेरी,
वो खुशियों की फुहार से
उसे भर ही देते हैं,
वो खुशियों की फुहार से
भर ही देते हैं।