मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में

मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में!
शाँम-ए-गुफ्तगूं होती है मयखाने में!
#पैमाने थक जाते हैं सब्र से मेरे,
वक्त तो लगता है ख्वाब को जलाने में!

Written By #महादेव

Comments

2 responses to “मैं कभी-कभी निकलता हूँ जमाने में”

  1. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    bht khoob!!

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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