मै और मेरी मां

मै और मेरी मां
तेरा ये शहर जाना,मुझे बीमार कर गया,
वेद ने लिखा औषधि में,तेरा दीदार चाहिए।।
अधूरा सा ही हूं, मै भी तेरे बिन,
पर इस जिंदगी को मां,थोड़ा मुकाम चाहिए।।

मुकाम भी मिलेगा तुझे, ये दुआ है मेरी, मुझे भी
इस मुकाम का जल्द, पैग़ाम चाहिए।।
तेरी दुआओ का ही बस, सहारा है मां,
सहारे को ना मुझे कोई, और नाम चाहिए।।

ठीक हूं मै, पर,, जल्द लौट आना तू
मुझे भी अब सहारे को, हाथ चाहिए।।
जल्द ही आऊंगा मां, जन्नत से तेरे चरणों में,
इस कान्हा को भी मां यशोदा, का प्यार चाहिए।।
AK

Comments

8 responses to “मै और मेरी मां”

  1. बहुत ही अच्छी

    1. धन्यवाद् जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    अतिसुंदर

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

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