तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,
बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
राही (अंजाना)
तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,
बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
राही (अंजाना)