मोहब्बत

तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “मोहब्बत”

  1. Panna Avatar

    सुन्दर रचना

  2. राम नरेशपुरवाला

    Waaah

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