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मोहर्रम की नजर

मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे
जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते
हुकुमत करते हम दुनिया में सारी
मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती

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