छोड़कर सब कुछ यहीं पर एक दिन जाना है,
लगा एक अजीब सा सदमा।
आज तक जो किया कुछ ना हो सका अपना।।
अगर यही हकीकत है,तो क्यो खुनी रात खेलते है,हम।
तो क्यो खेत की आड़ी के लिए लर जाते है,हम—
तो क्यो आँगन मे दिवार पर जाते है-क्यो।।
जो भाई साथ मे खाना खाते क्यो पराये बन जाते है,
माँ अजनबी बन जाती है,
पत्नी आँख के तारे बन जाती है -क्यो।।।
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