याद तो बहुत आओगे
और भूलना बेहद मुश्किल
तुम मेरे यादों में बसे
तुम मेरे बचपन के साथी
तुम मेरे भीगी आँखों की मुस्कान
तुम मेरे सपनो को पंख लगाते
तुम मुझे आसमानों की सैर कराते
तुम मुझे हँसने पे मज़बूर कर देते
तुम मुझे आज भी बचपन की याद दिलाते थे
तुम मुझे दुनिया में बहुत भाते थे
तुम मुझे कितना गुदगुदाते थे
तुम मुझे यूँ तनहा कर दोगे सोचा न था
याद तो बहुत आओगे
और भूलना बेहद मुश्किल
राजेश’अरमान’
— with Dr.krishan Bir Singh.
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