राजेश”अरमान”

वज़ूद आईने का सामने आ गया
जब कोई पत्थर से ठोकर खा गया

तब से सम्भाल रखता हूँ ज़ख्मों को
जब कोई दोस्त नमक ले आ गया

राजेश”अरमान”

Comments

3 responses to “राजेश”अरमान””

  1. Sridhar Avatar
    Sridhar

    nice …

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  3. Abhishek kumar

    Good

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