रिमझिम-रिमझिम जल बरसा,
आ गए काले बादल
दिन में छाया घोर अंधेरा
नभ में जैसे फैला काजल
बादल की आंख से जल बरसा
धूप को ये सारा जग तरसा
सर्दी के मौसम में
और भी ठंडा मौसम हुआ
देखो ना…
सब कुछ कितना निर्मल हुआ
लगता है सब धुला-धुला सा
अब मौसम हो गया खुला-खुला सा
धूल निकली वृक्ष, लताओं की
ठंडी-ठंडी पवन चली है
हरित पर्ण हिला-झुला कर,
दिखा रही है शान अपनी अदाओं की
कोहरा भी छंट गया,
कितना स्पष्ट सा दिख गया
______✍️गीता