रिश्ते क्षितिज की तरह
मिले से प्रतीत होते हैं
बंधन में बंधे लोग कब
इक दूजे करीब होते हैं
आकर्षण करीब लाता है
विकर्षण भी खूब भाता है
पास में टकराव है लेकिन
दूरी से ही सच नजर आता है
लम्बी सी कतार है लेकिन
इक तरफ झुकाव है लेकिन
आगे को ही स्नेह बरसता है
पीछे वाला अक्सर तरसता है