रोज़ होती रही तेरे वादों की बरसात
कमाल ये के कभी हम भीग नहीं पाएं
तंगदिल है मेरा या तेरा सिलसिला क़ाफ़िर
न तुम समझे न कुछ हम समझ नहीं पाएं
वक़्त के वलवले कुछ कम नज़र आते
ज़ख्म अपने ही मगर भर नहीं पाएं
तेरी रुखसत से जुड़ा कोई किस्सा हूँ
पढ़ना चाहा भी मगर पढ़ नहीं पाएं
अपनी मर्ज़ी भी कोई मर्ज़ी है ‘अरमान’
जो हुआ हम कुछ कर नहीं पाएं
रोज़ होती रही तेरे वादों की बरसात
कमाल ये के कभी हम भीग नहीं पाएं
राजेश ‘अरमान’ की बरसात
कमाल ये के कभी हम भीग नहीं पाएं
तंगदिल है मेरा या तेरा सिलसिला क़ाफ़िर
न तुम समझे न कुछ हम समझ नहीं पाएं
वक़्त के वलवले कुछ कम नज़र आते
ज़ख्म अपने ही मगर भर नहीं पाएं
तेरी रुखसत से जुड़ा कोई किस्सा हूँ
पढ़ना चाहा भी मगर पढ़ नहीं पाएं
अपनी मर्ज़ी भी कोई मर्ज़ी है ‘अरमान’
जो हुआ हम कुछ कर नहीं पाएं
रोज़ होती रही तेरे वादों की बरसात
कमाल ये के कभी हम भीग नहीं पाएं
राजेश ‘अरमान’
रोज़ होती रही तेरे वादों की बरसात
Comments
One response to “रोज़ होती रही तेरे वादों की बरसात”
-

वाह बहुत सुंदर
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.