लुप्त होते रहे गर

लुप्त होते रहे गर अच्छे इन्सां इसी तरह ,
इक दिन ये कहीं डाइनासोर न हो जाए
राजेश’अरमान’

Comments

3 responses to “लुप्त होते रहे गर”

    1. rajesh arman Avatar
      rajesh arman

      thanx

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