दूसरों पर निशाना साधना
हमने कब का बंद कर दिया
तब नादान थे, ना समझ थे
बेअक्ल थे, जिद्दी थे, बेचैन थे
अब सुधर गये हैं
पहले से कुछ बदल गए हैं
ना राज की जरूरत है
ना पाट की जरूरत है
ना किसी कुर्सी की
बस जुनून है
लिखते जाने का और
अपनी जिंदगी की एक
बेहतर रचना लिख जाने का
जिसे पढ़कर लोग याद रखें
जिस दिन ऐसी रचना
हमने लिख ली
हम अपनी लेखनी को विराम दे देंगे।।