लेखनी को विराम दे देंगे

दूसरों पर निशाना साधना
हमने कब का बंद कर दिया
तब नादान थे, ना समझ थे
बेअक्ल थे, जिद्दी थे, बेचैन थे
अब सुधर गये हैं
पहले से कुछ बदल गए हैं
ना राज की जरूरत है
ना पाट की जरूरत है
ना किसी कुर्सी की
बस जुनून है
लिखते जाने का और
अपनी जिंदगी की एक
बेहतर रचना लिख जाने का
जिसे पढ़कर लोग याद रखें
जिस दिन ऐसी रचना
हमने लिख ली
हम अपनी लेखनी को विराम दे देंगे।।

Comments

4 responses to “लेखनी को विराम दे देंगे”

  1. Amita

    लेखनी को विराम देने की आवश्यकता नहीं है,
    मिलती हमें सुंदर समीक्षा,और मिलती आलोचना भी यहीं है।

  2. Rishi Kumar

    बहुत बहुत सुंदर रचना प्रज्ञा जी आपकी कविता पढ़ कर के मैं निशब्द हो गया हूं अत्यंत सुंदर भाव समेटे हुए रचनाकार को यह प्रेरित करता है की नित उत्तम चीजें लिखिए जिसे देश समाज पढ़ें और अपना उत्थान करें

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