वस्ती की पुकार
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डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे।
चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे।
कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस वस्ती मे!!
कहने को कुछ बात बचे इस वस्ती से,अब दो–चार इंसान बचे इस वस्ती मे।
ज्योति कुमार
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