नाजों से पाली बिटिया
के विवाह का अवसर
विदाई का पल,
वह रोक नहीं सका
अपने आँसू।
दो आँसू क्या निकले,
भभक भभक कर रोने लगा,
याद आने लगे
बिटिया के बचपन के
पल,
कितना पापा पप्पा करती थी।
आज दुल्हन बन
चली अपने घर।
देखता रह गया वह राह।
नाजों से पाली बिटिया
के विवाह का अवसर
विदाई का पल,
वह रोक नहीं सका
अपने आँसू।
दो आँसू क्या निकले,
भभक भभक कर रोने लगा,
याद आने लगे
बिटिया के बचपन के
पल,
कितना पापा पप्पा करती थी।
आज दुल्हन बन
चली अपने घर।
देखता रह गया वह राह।