नाजों से पाली बिटिया
के विवाह का अवसर
विदाई का पल,
वह रोक नहीं सका
अपने आँसू।
दो आँसू क्या निकले,
भभक भभक कर रोने लगा,
याद आने लगे
बिटिया के बचपन के
पल,
कितना पापा पप्पा करती थी।
आज दुल्हन बन
चली अपने घर।
देखता रह गया वह राह।
विदाई
Comments
5 responses to “विदाई”
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विदाई का पल
मनमोहक रचना -

बहुत सुन्दर रचना
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बेटी की विदाई का वास्तविक चित्रण,
बहुत खूब सतीश जी। -

बहुत ही सुंदर
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अतिसुंदर
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