वो प्यारे सपने

कुछ तो जरूर होगा उन प्यारी सी आँखों में,
सपने तो उसके भी होंगे उड़ने के आसमानों में।
सहमी तो वो भी रहती होगी उस अनजानी भीड़ में,
घर से दूर उस बिन पहचानी सी पीर में।
अच्छे कपडे और खाने का शौक उसे भी तो होगा,
पर पैसों की मार ने शौकों को तोडा होगा।
उन अनजाने लोगों में अपनों की याद तो आती होगी,
अपनी बेबसी देख आंखों में नमी तो आती होगी।
स्कूल का बस्ता और किताबो का शौक भी तो होगा उसे,
मन के एक कोने में आशाओं का दीप सताता तो होगा उसे।
डर सी जाती है वो अपने हालातों को यूं देखकर,
जो उम्मीदों को रख देते हैं झंझोड़ कर।
आखिर वो क्या करे उन उम्मीदों का,
दिल में समेटे हुए उन सपनो का।
आखिर वो कहाँ जाये इस निर्दयी दुनिया में,
कौन है उसका इस घनी अँधेरी बगिया में।
शिवम् दांगी

Comments

4 responses to “वो प्यारे सपने”

  1. ज्योति कुमार Avatar
    ज्योति कुमार

    शिवम जी ,
    बहुत अच्छा

  2. Yogesh Chandra Goyal Avatar
    Yogesh Chandra Goyal

    बहुत अच्छे शिवम् भाई

  3. shivam Avatar

    धन्यवाद प्रिये मित्रों।

Leave a Reply

New Report

Close