सांझ पड़ रही है
धीरे धीरे अँधेरा
रफ़्तार ले रहा है।
चिडियांएं
घौंसलों में लौट रही हैं।
पहाड़ों की चोटियों से
झुरमुट-झुरमुट
उजाला लौट रहा है
छिपे सूरज की ओर।
अँधेरा उतर रहा है
नीचे की ओर।
आओ लाइट जलाते हैं,
अपने भीतर
उजाला बनाते हैं।
— Dr. satish Pandey