आज क्यों एकांत में
याद तेरी आ रही है,
क्यों हुआ बेचैन यह मन
क्यों उदासी छा रही है।
शायद किया बेचैन तूने
इसलिए ही मैं व्यथित हूँ
पर करूँ क्या प्रिय मेरे
तुझ से थोड़ा दूर जो हूँ।
आज क्यों एकांत में
याद तेरी आ रही है,
क्यों हुआ बेचैन यह मन
क्यों उदासी छा रही है।
शायद किया बेचैन तूने
इसलिए ही मैं व्यथित हूँ
पर करूँ क्या प्रिय मेरे
तुझ से थोड़ा दूर जो हूँ।