शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से

शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से,

आशिक़ हूँ जनाब कोई फरयादी नही

Comments

6 responses to “शिकवा करूँ क्या अपने उस महेरबान से”

  1. Anjali Gupta Avatar

    लगता है खुदा अब फरियाद नहीं सुनता
    नहीं तो अब तक सारे शिकवे मिट चुके होते|

    1. randhir_rsk Avatar

      गीले शिकवे जरूर मिट जाते,
      अगर वो हमसे नज़रें न चुराते

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