शेर

नजाने कब ख़तम होगी ज़द्दो ज़हद ज़िन्दगी की,
अभी टॉक उलझा हूँ ज़िन्दगी क सवालो मे।

अंदाज़ उसका बे मिसाल था,बेवफाई उसने की,
मगर मई बदनाम था।

ज़िन्दगी ने बहोत कुछ सीखा दिया मुझक।,
इस छोटी सी उम्र में,
किया ख़ुशी किया ग़म,कोण अपना कोण पराया,
बुरे वक़्त में कोई अपना नहीं होत।

ज़िन्दगी होने हमेसा अपनों के लिए गुज़ारी है,
चंद कागज़ के टुकड़े ने पराया कर दिय।

ज़िन्दगी एक खोवाइशों का समंदर है,
हर खोवैसे पूरी हूँ ये ज़रूरी तो नही।

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