सूखे नहीं थे धार आंशु के, पड़ गए खेतों मे फिर सूखे

सूखे नहीं थे धार आंशु के
पड़ गए खेतों मे फिर सूखे 

सूखे नहीं थे धार आंशु के
पड़ गए खेतों मे फिर सूखे 

सूखे नहीं थे अरमान
आश के
फिर क्यू रूठा भगवान खवाब से

करता हूँ तुमसे निवेदन
इतना भी सितम न कर
रूठी है खाने की थाली
प्यालों मे भी कम है पानी
तू तो है सबका भाग्यभिधाता
मैं भी हूँ किसी का अन्नदाता

ले ले चाहे जो परीक्षा
आशा कभी न हारेंगे
सींच आशुओं से धरती को
फिर से धान उगाएँगे
सूखे भले हो खेत ये मेरे
हारा नहीं है होसला ये
मेरा

सूखे नहीं थे धार आंशु के

पड़ गए खेतों मे फिर सूखे
———-
-दिनेश कुमार-

Comments

10 responses to “सूखे नहीं थे धार आंशु के, पड़ गए खेतों मे फिर सूखे”

  1. सीमा राठी Avatar

    अच्छा प्रयास दिनेशजी

    1. Dinesh Avatar

      Thank you.., i need more motivation..,

  2. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    BEHATREEN KOSHISH

  3. Abhishek kumar

    Gr8

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