हमें औरों सा ना समझ,
आंखों से और बातों से,
इरादों को भांप लेते हैं।
ये झाड़ पर चढ़ाना,
मीठी-मीठी बातें बनाना,
यहां नहीं चलेगा,
हम स्वार्थ की चाह को,
दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच लेते हैं।
हमें औरों सा ना समझ,
आंखों से और बातों से,
इरादों को भांप लेते हैं।
ये झाड़ पर चढ़ाना,
मीठी-मीठी बातें बनाना,
यहां नहीं चलेगा,
हम स्वार्थ की चाह को,
दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच लेते हैं।