हमें औरों सा ना समझ,
आंखों से और बातों से,
इरादों को भांप लेते हैं।
ये झाड़ पर चढ़ाना,
मीठी-मीठी बातें बनाना,
यहां नहीं चलेगा,
हम स्वार्थ की चाह को,
दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच लेते हैं।
हमें औरों-सा ना समझ…
Comments
14 responses to “हमें औरों-सा ना समझ…”
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Good
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Thank you
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बहुत खूबसूरत
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Nice 👍
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वाह
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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वाह
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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क्या बात है, अतिसुन्दर
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बहुत बहुत आभार 🙏
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Good
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बहुत बहुत धन्यवाद
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