सहनशीलता की तू देवी ,
हर किरदारों में ढल लेती,
‘मानुष’ तेरी महिमा का ,
करता गुणगान है ,
हे! सबला, तू महान है।
अर्धांगिनी बनकर,
तुने हर धर्म निभाया ,
बंद मकान को ,
तूने घर बनाया ,
हर पति को होता,
तुझ पर बड़ा गुमान है ,
हे!सबला तू महान है।
मां बनकर तूने,
बहुत दर्द सहा,
रोयी बहुत,
मगर कुछ ना कहा,
ममता तेरी निस्वार्थ,
तेरी पवित्रता की पहचान है ,
हे! सबला तू महान है।
बहन बनी जब,
तूने खुशियां बांटी,
प्रेम मिठाई हमेशा,
भाईयों को खिलाई,
अपना हिस्सा हमेशा ,
तूने किया बलिदान है,
हे!सबला तू महान है।
तू वीरांगना बनी,
तू प्रेरणा बनी
मातृभूमि की प्रतिष्ठा बनी,
रिश्तो से ऊपर भी,
तेरी अपनी एक मिशाल है
हे!सबला तू महान है
…….मोहन सिंह मानुष