हज़ार दवा है बस इक बुख़ार के लिए।
अब दुआ ही करो इस बीमार के लिए।।
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हम ख़ुशी से रहते है मौसम चाहें जो हो।
अब इंतज़ार थोड़े करेंगे बहार के लिए।।
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यहाँ ज़ख्मो और चेहरो की बात न करेंगे।
बस अब हौसला नहीं है ऐतबार के लिए।।
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जज्बातों से खेलने की सज़ा कोई हो गर।
इक जगह रखना उस गुनहगार के लिए।।
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किसे फ़ुरसत की कोई हमकों भी मिलें ।
हम ही मिलते है नींदों से बस इतवार के लिए।।
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साहिल आसान नहीं होती है जिंदगी कभी।
बस हौंसला न छोड़ना उस पार के लिए।।
@@@@RK@@@@
हज़ार दवा है बस इक बुख़ार के लिए
Comments
3 responses to “हज़ार दवा है बस इक बुख़ार के लिए”
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वाह ! बहुत खूब
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धन्यवाद आपका।
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वाह बहुत सुंदर
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