ज़िंदगी क्या है एक अदाकारी है

ज़िंदगी क्या है एक अदाकारी है
न तुम्हारी है न हमारी है
ख्वाब आये भी तो रात के पिछले पहर
क्या कहे कैसे बाकी रात गुजारी है
मुझसे मत पूछ वफ़ा क्या होती है
ये क्या तुम्हारी वफादारी है
मैं कोई हर्फ़ नहीं जो मिट जाऊं
कुछ तो हममे भी दुनियादारी है
कोई क्या बतलाये तुझे ‘अरमान’
ज़िंदगी तूने भी तो गुजारी है
ज़िंदगी क्या है एक अदाकारी है
न तुम्हारी है न हमारी है
राजेश ‘अरमान’

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