ज़ेहन में बैठे rajesh arman 11 years ago ज़ेहन में बैठे कई अफ़सोस है बोलते सन्नाटे जुबां खामोश है अब वज़ूद कछुए का मिट गया बाज़ी जीतता सोता खरगोश है राजेश’अरमान’