हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

4 Comments

  1. गिने तो हमने भी जिंदगी के दिन हमने……
    बस लकीरे ही रह गयी ……
    गिनने के लिए जो खींची थी……
    घर की दीवारों में……
    सारा घ्रर धीरे धीरे खाली हो गया

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