संसार और मैं

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जग सारा सोता है जब तब मैं जागता रहता हूँ,
तेरी यादों में अश्कों से दर्द बांटता रहता हूँ,
तेरी रूह की साये से मैं दूर भागता रहता हूँ,
खुद से खुद  की  तस्वीर छाटता रहता हूँ ,
बस रात यूँ ही कट जाती है और दिन मुझको दौड़ाता है ,
दिन में भी तुझको पाने के दिवा-स्वप्न ताकता  रहता हूँ,
जग सारा सोता है जब तब मैं जगता रहता हूँ,……….

Comments

7 responses to “संसार और मैं”

  1. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    मैं जगता रहता हूँ,……ता-उम्र यही चलता रहता है …….बहुत खूब….उशेष भाई !!

    1. Ushesh Tripathi Avatar
      Ushesh Tripathi

      धन्यवाद भैय्या

  2. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    बहुत खूब 🙂

    1. Ushesh Tripathi Avatar
      Ushesh Tripathi

      Dhanyabad

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. Abhishek kumar

    Nice

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