कुछ अकेले से एहसास

कुछ अकेले से एहसास
फिरते है दरम्या मेरे
कुछ कशिश है उदास
फासलों के घने अँधेरे
दबे कदम चलती साँसें
सहमे कदम आते सबेरे
हलकी बारिश का मौसम
आँखों में धुँआ के फेरे
सोती रात जागती ज़िंदगी
आये शायद नए सवेरे
राजेश’अरमान’

Comments

2 responses to “कुछ अकेले से एहसास”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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