मुट्ठी में अपने आकाश

मुट्ठी में अपने आकाश, भरने का इरादा रखता हूँ
तारों को हथेलिओं में ,सजाने का इरादा रखता हूँ
किसी गिरी हुई इमारत की बस इक ईट सही ,
बुलंद इमारत फिर भी ,बनाने का इरादा रखता हूँ
राजेश ‘अरमान’

Comments

2 responses to “मुट्ठी में अपने आकाश”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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