ज़िंदगी का खेल

ज़िंदगी का खेल साँप-सीढी से है जुदा
यहाँ तो हर अंक पे साँप बैठे है
राजेश’अरमान’

Comments

2 responses to “ज़िंदगी का खेल”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

Leave a Reply

New Report

Close