तूफां ने लहरों को कब ज़िंदगी दी है
हवाओं ने चरागों को कब रौशनी दी है
चाँद को तकता है थोड़ी सी रौशनी के लिए ,
सूरज ने कब जुगनुओं को रौशनी दी है
राजेश’अरमान ‘
तूफां ने लहरों को कब ज़िंदगी दी है
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One response to “तूफां ने लहरों को कब ज़िंदगी दी है”
-

वाह
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