शांति ओढ़ लेना

शांति ओढ़ लेना
प्रतिरोध छोड़ देना
ज़रूरी नहीं कायरता ही हो
हो सकता है
आने वाले संघर्ष की तैयारी हो

बात बात में ताने देना
देखने पर आँखे मटकाना
बोलते वक़्त मुह बिचकाना
ज़रूरी नहीं कि यह नफरत का प्रदर्शन हो
हो सकता है कि यह मानसिक बीमारी हो

चीखों का तड़पते रहना
जवानी का मचलते रहना
शमा का जलने से पहले बुझ जाना
ज़रूरी नहीं कि कमज़ोरी हो
हो सकता है हवा का ज़ोर भारी हो

ऑफिस में काम न कर पाना
फाइलों का काम तमाम करना
लाल फीते की जकड़न से
साँसों का घुटते रहना
ज़रूरी नहीं कि हराम खोरी हो
हो सकता है
ये नौकरी सरकारी हो ।

तेज

Comments

One response to “शांति ओढ़ लेना”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह

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