Tej Pratap Narayan, Author at Saavan's Posts

मैं यह शिद्दत से महसूस करता हूँ

मैं यह शिद्दत से महसूस करता हूँ लिख – लिख कर मैं कागज नहीं अन्तर की रिक्तता को भरता हूँ रिक्त स्थान कुछ ऐसे हैं… मन के अन्दर बैठे हैं वें प्रश्न पूंछ्ते रहते हैं मैं उत्तर देता रहता हूँ दुनिया हिस्सों में बंटी हुई कितने किश्तों में कटी हुई एक दूसरे से कितनी सटी हुई मन चाहे सबको एक करुँ बेफिक्रो की भी थोड़ी फिक्र करुँ दुनिया की ही केवल फिक्र नहीं मैं अपनी फिक्रो में भी रहता हूँ ज़िंदगी ... »

मेरे मोहल्ले में स्कूल खुलने दो

  मेरे मोहल्ले में न मंदिर बनाओ … न मस्ज़िद बनाओ यदि बनाना ही है तो एक स्कूल बनाओ मेरे मोहल्ले में न गीता का पाठ हो न जुमे की नमाज़ हो अगर पाठ कोई हो तो वह इंसानियत का पाठ हो मेरे मोहल्ले में न पंडित को भेजो और न पूजा को भेजो न क़ाज़ी को भेजो और न नमाज़ी को भेजो अगर भेजना ही है तो शिक्षा को भेजो और शिक्षक को भेजो मेरे मोहल्ले में न हिन्दू बनाओ और न मुसलमान बनाओ इंसान को इंसानियत से घेरो और इ... »

रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं

रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं और वह अंधेरों में छिपता रहा तन्हाइयों में खोता गया और सूरज से आँख मिलाने से डरता रहा दिन दिन न थे उसके अब रातों का उसको इंतज़ार रहने लगा इतना पर्दा बढ़ा कि ख़ुद से भी वह छुपने लगा अँधेरे अच्छे लगने लगे धीरे धीरे दूर जाते रहे उसके जीवन से सवेरे वह अपने जीवन से दूर जाता रहा सब कुछ खोता रहा तभी किसी प्रेरणा से उसने कलम उठा ली लिखने को अपने जीवन में जगह दी अवसाद मन के वह कागज़... »

मोहब्बत की गवाही

मोहब्बत की गवाही देने लगती हैं धड़कने सुलझाने से सुलझ जाती है सब उलझने चाँद को पाने की हिम्मत आने लगती है ज़िंदगी में आती हैं जितनी अड़चने ! Like Comment »

शांति ओढ़ लेना

शांति ओढ़ लेना प्रतिरोध छोड़ देना ज़रूरी नहीं कायरता ही हो हो सकता है आने वाले संघर्ष की तैयारी हो बात बात में ताने देना देखने पर आँखे मटकाना बोलते वक़्त मुह बिचकाना ज़रूरी नहीं कि यह नफरत का प्रदर्शन हो हो सकता है कि यह मानसिक बीमारी हो चीखों का तड़पते रहना जवानी का मचलते रहना शमा का जलने से पहले बुझ जाना ज़रूरी नहीं कि कमज़ोरी हो हो सकता है हवा का ज़ोर भारी हो ऑफिस में काम न कर पाना फाइलों का काम तमाम कर... »

जापान से बुलेट ट्रेन लाने की ज़रूरत नहीं है

जापान से बुलेट ट्रेन लाने की ज़रूरत नहीं है बुलेट ट्रेन हम भी बना सकते हैं और चला सकते हैं अगर जापान से कुछ लाना ही है … तो उनकी आदतें लाई जाएँ उनकी सांस्कृतिक सौगातें दिखाई जाएँ उनकी कार्यसंस्कृति अपनाई जाए वैज्ञानिक प्रवृत्रियों का आयात हो सिर्फ जुमलों में न बात हो सामंती आदतों पर प्रतिघात हो उस देश से कुछ सीखा जाए जिस देश ने युद्ध की विभीषिका को सहा जो देश परमाणु अस्त्रों की आग में जला फिर... »

टेक्नोलॉजी कैसे आएगी

टेक्नोलॉजी कैसे आएगी ——––—-/–/——-// टेकनोलॉजी कैसे आएगी इस देश में जब तर्क को आस्था के डिब्बे में बंद कर दिया गया हो … जब विज्ञान को धर्म के तले दबा दिया गया हो जब देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति घंटों गंगा की आरती करता हो जब मिसाइल के प्रक्षेपण से लेकर घर बनवाने तक में हर छोटे बड़े कार्य में मन्त्र पढ़े जाते हों नारियल फोड़े जाते हों चमत्कार की आशा ... »

‎international‬ knowledge day

जो समाज में समता का समर्थक है जो देश का विकास चाहता है जो अंधकार की जगह प्रकाश चाहता है जो अंध विश्वास ,पाखंड ,भेदभाव हटाना चाहता है जो सामाजिक दीवारों को तोड़ना चाहता है … जो धर्म ,संप्रदाय और जाति से उठकर इंसान को इंसान से जोड़ना चाहता है वह अंबेडकर का समर्थक होगा वह किसी खांचे में बंटा नही होगा न वह धर्म होगा न वह वर्ग होगा न जाति होगा वह जोंक की तरह समाज से लिपटा हुआ उसको चूसेगा नहीं वह सम... »

यह जापान है

यह जापान है ——————- यह हिंदुस्तान नहीं ,बाबू … जापान है जहाँ गुरु ग्राम और घंटा घड़ियाल नहीं विज्ञान है यहाँ आप आज़ाद है अपने विकास के लिए उन्नति के प्रयास के लिए यहाँ नम्रता है फालतू का दिखावा नहीं जो है ,वह वास्तविक है कोई छलावा नही कोई छुआ छूत नहीं लोग परजीवी की तरह समाज को चूसते नहीं हर असफलता और नाकामी के लिए भगवान को कोसते नहीं मन्त्र उनका सरल है बुद्ध... »

वर्चुअल दुनिया

वो कनेक्ट होना चाहता है पूरी दुनिया से वर्चुअली लेकिंन अपनी रियल दुनिया के लिए … उसको फुरसत नही फेस बुक पर 5000 मित्र है और 10000 फॉलोवर ट्विटर में ट्रेंड करता है वह और इंस्टाग्राम में हिट है पर उसका दुनिया में कोई रियल मित्र नही वर्चुअल दुनिया के डिस्कशन का हीरो है किसानो की समस्या हो या नारी पर अत्याचार आर्थिक नीति हो या भ्रष्टाचार पर रियलिटी से कोई सम्बन्ध नहीं फेस बुक पर ही इश्क़ करता है ... »

अन्याय

अन्याय इस लिए नही हैं कि वह बहुत शक्तिशाली है और उसका पलड़ा भारी है वह हर जगह छाया है… उसने अपना घर बसाया है अन्याय इसलिए है क्यों कि हम अपनी आवाज़ उठा नही पाते अपनी बात पहुंचा नही पाते उसकी नीव हिला नही पाते आँखे मूंदे रहते हैं समाज को बांटे रहते हैं कभी जाति के नाम पर कभी धर्म के नाम पर कभी सम्बन्धों की सार्थकता के नाम पर कभी व्यहार्यता के नाम पर और अन्याय बढ़ता जाता है सूरज को निगलता जाता है... »

ज़िंदगी

ज़िंदगी में ऐसे काज करो कि ज़िंदगी पे थोड़ा नाज़ करो ज़िंदगी को रिलैक्स करो ज़िंदगी का हेड मसाज़ करो फिर … ज़िंदगी से कुछ सवाल करो ज़िंदगी पे यक़ीन करो ज़िंदगी को न ग़मगीन करो माँ की आँखों का तारा बन कर अँधेरे में सितारा बनकर ज़िंदगी को ज़रा रंगीन करो ज़िंदगी के तनिक हमराज़ बनो ज़िंदगी में एक साज़ बनो मज़लूमो की आवाज़ बनो मासूमियत ,अल्हड़पना और इंसानियत की ज़िंदा यहाँ मिसाल बनो । तेज »

जब कोई धर्म साज़िशों का पुलिंदा बन जाता है

जब कोई धर्म साज़िशों का पुलिंदा बन जाता है तब धर्म केवल धंधा बन जाता है शोषण और लूटपाट ही दलालों का एजेंडा होता है इंसानियत मर जाती है और खोखला धर्म ही केवल ज़िंदा होता है देवी पूजी जाती हैं और स्त्रियों का शोषण होता है छुआ-छूत ,झूठ और पाखंड का दृश्य बड़ा भीषण होता है ईश्वर के बहाने आदमी को लतियाया जाता है पशु पूजे जाते हैं और इंसानो को मरवाया जाता है पाप ,पुण्य बन जाता है शरीफ़ होना संताप हो जाता है ... »

poem

एक फूल के लिए कितना मुश्किल होता है कि वह अपनी पंखुड़ियों को तूफानों से बचा ले छिटकने न दें … पराग कणों को बिखरने न दे एक पेंड के लिए बड़ा कठिन होता है अपने अस्तित्व को बनाए रखना अपनी जड़ों में समाए रहना और अपनी शाखाओं को बचाए रखना धूप से ,बारिश से,सूखा से और बाढ़ से एक ट्रेन भी संतुलन बना लेती है दो पटरियों के बीच पटरियों से टकराती हुई चोट पर चोट खाती हुई फिर भी चलती जाती है अपने सफ़र पर बिना रु... »

मैं और तुम

मैं और तुम साथ साथ बड़े हुए दोनों साथ- साथ अपने पैरों पर खड़े हुए तुम्हारी शाखाएं बढ़ने लगीं पत्तियां बनने लगीं दोनों एक साथ जीवन में आगे बढ़े अपने -अपने कर्मों के साथ् तुमने जीवन को हवा दी साँसे दी जीने के लिए छाया दी बैठने के लिए कितनों को आश्रय दिया रहने के लिए मैंने भी घर बनाया रहने के लिए नींव डलवाई दीवाल खिंचवाई खिड़कियां दरवाज़े लगवाये फिर घर के फर्नीचर आये सब तुम्हारे कारण ही तुम्हारे अंग -अंग क... »

छटपटाहटों की ज़ुबान

अपनी छटपटाहटों को ही देता हूँ मन के जज़्बातों को डायरी में उतार लेता हूँ ये छटपटाहटें सिर्फ मेरी अपनी ही नहीं औरों की छटपटाहटों को भी उधार लेता हूँ अंदर और बाहर की लड़ाईयों के लिए कलम को हथियार बना लेता हूँ । तेज »

यह बात अफवाह सी लगती है !

ये बात अफवाह सी लगती है कि ,सच्चा प्रेम कहीं मिला भीड़ में कहीं इंसान दिखा यह बात अफवाह सी लगती है कहीं ज्ञान का दीपक जला किसी के हिस्से का अँधेरा मिटा कुछ ज़िन्दगियों को बसेरा मिला किसी की ज़िन्दगी में सवेरा हुआ यह बात अफवाह सी लगती है कि,कहीं ईमानदार आगे बढ़ा कोई शोषित दलित उन्नति के शिखर पर चढ़ा कहीं जाति,धर्म ,रंग,लिंग के भेद पर भेदभाव नहीं हुआ कहीं भ्रष्टाचार का प्रभाव कम हुआ यह बात अफवाह सी लगती ... »

यात्रा जो पूरी न होती ।

शाम का समय सूरज विश्राम करने को तत्पर दिन पर तपने के बाद सारी दुनिया तकने के बाद अपूर्ण ख्वहिशे दिन भर की मन में रखे हुए ये सोंच कर कि चलों रात में चन्द्रमा की शीतल छाया होगी पर ये क्या ये तो अँधेरी रात थी केंवल घनघोर अँन्धेरा दिख रहा चारों ओर असमय ही बादलों ने बरसात की तन तो भीग गया पर मन अतृप्त रहा अपने अतृप्त मन के साथ सूरज रात में यात्राएं करने लगा इस छोर से उस छोर तक बिन बात भटकने लगा वो कुछ ... »

Two Liner

हरी जाली से देखने पर सूखे पेंड भी हरे लगते हैं नज़र का फ़ेर हो जाए तो पिलपिले भी खरे लगते है । तेज »

होते हैं

एक युद्ध में कितने युद्ध छिपे होते हैं हर बात में कितने किंतु छिपे होते हैं नींव का पत्थर दिखाई नहीं पड़ता अक्सर रेल चलती है पर पटरियों के जैसे सिरे दबे होते हैं जिसने क़त्ल किया उसका पता नहीं चलता जब औरों के कंधों के सहारे बंदूक चले होते हैं रक्षा कवच होता है धूर्त और मक्कारों के पास फंसते वही हैं जो लोग भले होते हैं यकीन उठता जाता है इंसान का इंसानों से छांछ भी फूंक कर पीते हैं जो दूध के जले होते ... »

मोहब्बत की नज़्मों को फिर से गाया जाए

मोहब्बत की नज़्मों को फिर से गाया जाए अपनी आज़ादी को थोड़ा और बढ़ाया जाए हक़ मिला नहीं बेआवाज़ों को आज तक हक़ लेना है तो अब आवाज़ उठाया जाए किसी इंसान को भगवान बनाने से पहले हर इंसान को एक इंसान बनाया जाए कैसे बनेंगे हर रोज़ नए नग़मे क्यों न पुराने नग़मों को ही फिर से गाया जाए गिरने वालों को उठाने की बात करते हैं क्यों न लोगों को गिरने से बचाया जाए बहुत हो चुकी मज़हबी बातें और सियासी बिसातें अब सियासत से मज़हब... »

Poetry

Poetry ———— Poetry is Neither frustration Nor speculation Poetry creates a situation where we get solution Poetry is an inspiration To live and let live Poetry is like meditation Where differences of caste,creed,race,colour ,religion and country dilute As sugar dilutes in water Poetry is an Art of living Art of giving Art of letting and Art of loving . Tej »

पवित्र नारी ही क्यों हो

पवित्र नारी ही क्यों हो पुरुष की पवित्रता का क्या मोल नहीं ? पतिव्रता नारी ही क्यों पुरुष के पत्नी व्रत का क्या कोई तोल नहीं ? सारी सीमाऐं सारी गरिमाएं मर्यादाएं नारियों तक ही सीमित हैं पुरुषों पर कोई जोर नहीं नारी ही सती हो अग्नि परीक्षा भी उसी की हो तुलसी बाबा ताड़न की अधिकारी कहें कबीर जी महा ठगिनी कहें उसी को नकाब लगाना है अपना चेहरा छुपाना है चरणों की दासी भी वही है प्रेम की प्यासी भी वही है उ... »

कुछ न होगा

सिर्फ संकेतो और प्रतीकों से कुछ न होगा सिर्फ परंपरागत तरीक़ों से कुछ न होगा सिर्फ नारे बाज़ी से भी कुछ न होगा सिर्फ आज़ादी से भी कुछ न होगा सिर्फ चेहरे नहीं चरित्र बदलना होगा सिर्फ शतरंज के मोहरो को बदलने से क्या होगा । तेज »

थोड़ी दूरियां भी अच्छी

सुपर डेंस फेज में जब कण होते हैं तब बिस्फोट के कई कारण होते हैं बिग बैंग भी तभी होता है और अणु, परमाणु ,न्यूट्रॉन ,इलेक्ट्रान और प्रोटोन सभी छितरा जाते हैं अणुओं का स्वतंत्र अस्तित्व है क्यों कि उनके बीच अधिक लगाव है और थोडाअलगाव है आकर्षण और थोड़ा प्रतिकर्षण है उनमे आपस में संतलुन है जैसे दो कण आकर्षण के कारण अधिकतम निकट आते हैं तभी उनके बीच प्रतिकर्षण होने लगता है अन्यथा वें घर्षण के कारण एक दूसर... »

चलो थोड़ा जादू करते हैं

चलो थोड़ा जादू करते हैं जनता के दिल को छूती हुई एक कविता लिखते हैं झोपड़ियों में पल रही भूख से टकराते हैं छोटे छोटे मासूमों की चीख और डूबती हुई ज़िंदगियों को कविता का विषय बनाते हैं लड़ते हैं अफगानिस्तान की पहाड़ियों के बीच पल रहे आतंक से अफ्रीका के अँधेरे से अमेरकियों के पूजी वाद से सीरिया में इस्लामिक स्टेट से टकराते हैं ईराक़ और ईरान की कुछ बाते करते हैं नक्सलियों के नक्सलवाद से मिलते है आओ राजधानी स... »

ज़मी मैल को बहाया जाए

ज़्यादा दिमाग़ न आज लगाया जाए सिर्फ मन में ज़मी मैल को बहाया जाए धर्म और परंपरा की ऐसी भी न कट्टरता हो कि होलिका की तरह औरत को जलाया जाए सौहार्द और प्यार का रंग भरकर मन में जो रूठे हैं आज उनको मनाया जाए रंगो ,अबीरों और गुलालों की बारिश करके दिल को पानी कर ,पानी को बचाया जाए »

जिन बाज़ारों में बड़ी रौनक़ है

जिन बाज़ारों में बड़ी रौनक़ है कल सन्नाटा उनमे छाएगा बंद होनी हैं दुकाने सब ऐसा बाज़ार नहीं रह पाएगा नफ़रत के अंधेरों में जो सौदेबाज़ी होती है जिन जिन लोगों की भी उसमे हिस्से दारी होती है अब ये सौदा न हो पाएगा और न हिस्सा भी मिल पाएगा न ऊपर से फ़रिश्ते आएंगे और न दूर से परिंदे आएंगे अपने अपने हक़ की खातिर इस धरती से निकल सब आएंगे धूप छन छन के अब आएगी सारे परदे जल जाएंगे छिपा रहा जो सदियों से अब वह न छिप प... »

बहुत ज़रूरी है

अच्छी कविताएँ लिखना उतना महत्वपूर्ण नही है उन्हें अच्छे से प्रमोट होना बहुत ज़रूरी है ऑफिस में काम भी उतना आवश्यक नहीं आपका गुड बुक्स में नोट होना बहुत ज़रूरी है सामाजिक प्रतिबद्धता उतनी महत्वपूर्ण नहीं है दिखावे के लिए ही सही कुरीतियों पर चोट होना बहुत ज़रूरी है लोकतंत्र में जनता का शासन होना अनिवार्य नहीं जनता का चुनाव में सिर्फ वोट होना बहुत ज़रूरी है जनता भूखी मरती है तो मरती रहे सरकार के लिए उद्य... »

poetry

Poetry is Neither frustration Nor speculation Poetry creates a situation where we get solution Poetry is an inspiration To live and let live Poetry is like meditation Where differences of caste,creed,race,colour ,religion and country dilute As sugar dilutes in water Poetry is an Art of living Art of giving Art of letting and Art of loving . Tej »

वह

वह आसमान में सीढियां लगाए चढ़ा जा रहा है जो पीछे था आगे बढ़ा जा रहा है देखता जा रहा है वह सपने पे सपने यथार्थ के बल ने टेके हैं घुटने वह हरी दूब है कहीं भी उग सकता है उखाड़ कर फेक देने के बाद जहाँ भी फेका जाएगा उग जाएगा जिएगा खुद औरों को ज़िलायेगा हरापन ही फैलाएगा बसंत ही लाएगा वह जीत है लेकिन हार को भी गले लगाएगा वह गीत है दुःख में भी गाया जाएगा और सुख में भी गाया जाएगा वह प्रेम है प्रेम ही फैलायेगा ... »

गंध

वह अदृश्य गंध अनाम सी अपरिभाषित सी मन में बसी हुई जानी पहचानी सी जिसकी खोज ज़ारी है कल्पना के कितने ही क्षण जी उठते हैं अनिरवचनीय आंनद के रस पी उठते हैं हवा में कुछ घुल सा जाता है जब आँचल तेरा लहराता है अद्भुत सी अंगड़ाइयां तेरी सूर्य को पराजित करती परछाइयाँ तेरी रात में चंद्रमा भी टकटकी लगाए रहता है थोड़ी सी गंध बस जाए उसके मन में भी वह कहता है पर दूरियों का क्या करे वह मज़बूरियों का क्या करे वह सिर्... »

यदि जड़ें ऊपर हो

यदि जड़ें ऊपर हो और तने नीचे तो न जड़ें गहराई पा सकती हैं और न तने का ही विकास होता है यदि जहां खिड़की होनी चाहिए वहां दरवाजे हों जब शांत वातावरण की चाहत हो तब बज रहे बाजे हों ऐसे में न शुद्ध हवा होती है और न ही पर्याप्त प्रकाश होता है यदि जहां खेत खलिहान होने चाहिए वहां कंक्रीट का जंगल हो जहां कानून ,व्यवस्था का राज्य होना चाहिए वहां अव्यवस्था का दंगल हो ऐसे में न सब के लिए रोटी होती है और न ही कोई ... »

Titleless

मेरे बाहर के यूनिवर्स को और मेरे अंदर के यूनिवर्स को मेरे अंतर्द्वंद को और बहिर्द्वंद को कविताएँ तराज़ू की तरह दोनों पलड़ों पर बिठाए रखती हैं कभी यह पलड़ा भारी हो जाता है तो कभी वह कविताएं नाव की तरह ज़िंदगी को अपने कंधों पर बिठाए हुए समस्त विषादों ,वेदनाओं ,चेतनाओं और संवेदनाओं को उठाए हुए जीवन की धुरी बन जाती हैं जीवन का नज़रिया और जीने का ज़रिया बन जाती हैं गहन अनुभूतियों को शब्द देती हुई शोर भरे वात... »

समीकरण

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले घाव चाँद का उगना कोने कोने को प्रकाशित करना रात अनमनी सोई सी चीखती दीवार कर्ण पट का फट जाना आदमियों का ज़िंदा गोस्त हो जाना श्वान ,बिलाव शिकारों की ताक में पेट भरने के फ़िराक़ में इंसानों क... »

समीकरण

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले घाव चाँद का उगना कोने कोने को प्रकाशित करना रात अनमनी सोई सी चीखती दीवार कर्ण पट का फट जाना आदमियों का ज़िंदा गोस्त हो जाना श्वान ,बिलाव शिकारों की ताक में पेट भरने के फ़िराक़ में इंसानों क... »

बेड़ियां

बेड़ियां जो पैरों में उसे घुंघरू बना लें आओ ज़िंदगी का मज़ा लें नाच ,गा लें औरों को नचा दें ज़िंदगी को खुशियों से सज़ा लें आओ बाधाओं को अवसर बना लें सूखती नदियों में बादलों को बरसा दें । आसमान में खेती करके धरती को लहलहा दे सबकी भूख मिटा दे आओ सब मिलकर असंभव को संभव बना दें । »

साध्य और साधन

शोषक और शोषित दो समांतर रेखाओं की तरह हैं जिनका कभी मिलन नहीं होता इसलिए शोषण का कभी अंत नहीं होता शोषक चाहे अफ्रीका का हो चाहे अमरीका का हो हिंदुस्तान का सीरिया या पाकिस्तान का उनकी भाषाएँ अलग हैं मान्यताएं अलग हैं चेहरे अलग हैं पर मानसिकताएं एक जैसी हैं उनके तने अलग अलग हैं उनकी शाखाएं पतली मोटी हो सकती हैं उनकी पत्तियां संकरी चौड़ी हो सकती हैं उनके फूल विविध रंगों के हो सकते हैं पर ज़मीन के अंदर ... »