माँ शारदे की इतनी रहमत बरसती है
लेखनी भी आपके पास रहने को तरसती है
मन के भाव इतने गहरे होते हैं
शब्द जैसे माला के मोती पिरोये होते हैं
संचालन इतना बखूब होता है
इक समां सा बंध जाता है
मन मेरा आपको सेल्यूट मारने को चाहता है ।
गुरु पूर्णिमा पर आपके लिए विशेष
– रीता अरोरा
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